भक्ति गीत : सावन का तीसरा सोमवार

भक्ति गीत : सावन का तीसरा सोमवार
“भगवान भोलेनाथ जी, आपकी कृपा है बड़ी निराली,
सावन लेकर आया है महादेव, घर घर में खुशहाली।“
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सावन का आज तीसरा सोमवार आया है,
भोलेनाथ ने फिर अपना डमरू बजाया है।
डमरू की आवाज, सुन रहे हैं भक्त सारे,
महादेव ने दरबार में भक्तों को बुलाया है।
सावन का आज तीसरा………..
लगाता है दिल से जो शिव का जयकारा,
समय आने पर शिव देते उसको सहारा।
सारे सपने साकार कर देते त्रिभुवन नाथ,
भक्तों को महादेव ने कष्टों से बचाया है।
सावन का आज तीसरा………..
जा रहे कांवरिया लेते हुए शिव का नाम,
कोई त्रंबकेश्वर और कोई बैद्यनाथ धाम।
सबके मुंह में केवल बोल बम, बोल बम,
शक्ति ने भक्ति को रास्ता दिखलाया है।
सावन का आज तीसरा………….
रिमझिम रिमझिम कैसे बरस रहा सावन?
शिव की कृपा से महक रहा है घर आंगन।
एक ही बोली में है कांवरिया की हर टोली,
तीसरे सोमवार ने और विश्वास जगाया है।
सावन का आज तीसरा……….
नंगे पांव, नंगे बदन चल रहे हैं कांवरिया,
पास लग रही है उनको बाबा की नगरिया।
कोई थकान नहीं दिख रही किसी चेहरे पर,
कैलाशपति ने भक्तों का साहस बढ़ाया है।
सावन का आज तीसरा………..
प्रमाणित किया जाता है कि यह रचना स्वरचित, मौलिक एवं अप्रकाशित है। इसका सर्वाधिकार कवि/कलमकार के पास सुरक्षित है।
सूबेदार कृष्णदेव प्रसाद सिंह,
जयनगर (मधुबनी) बिहार/
नासिक (महाराष्ट्र)




