द्वादश ज्योतिर्लिंग

द्वादश ज्योतिर्लिंग
धरती पर बारह जगह शिव
ज्योति बनकर विराजे हैं।
जहां दर्शन करने मात्र से,
सात जन्मों के पाप भाजे है।
सोमनाथ गुजरात नगर में,
सागर के तट पर बसे प्रभु ।
चंद्रदेव ने पूजा की मन से,
रोग मिटा दिया शिव शंभू।
मल्लिकार्जुन श्रीशैल पहाड़ी,
पार्वती-शिव बैठे हुए साथ,
भक्तों को अपनाया प्रभु ने,
ऐसे दयालु मेरे भोलेनाथ।
महाकाल उज्जैन की नगरी,
काल भी शीश झुकाया है।
कालो के भी देव महादेव,
महाकालेश्वर कहलाया है।
ओंकारेश्वर नर्मदा के किनारे,
शिव बिराजे ॐ के आकार।
देवों के भी महादेव प्रभु मेरे,
कहलाते हैं करूणा अवतार।
केदारनाथ हिम की गोद में,
पांडवों ने तप कर दर्शन पाया।
पर्वत पर प्रभु आन बिराजो,
भक्तों पर करुणा बरसाया।
भीमाशंकर महाराष्ट्र के वन में,
भीम ने राक्षस मार गिराया।
अपने बल, श्रद्धा भक्ति से,
भीम ने शिव को रहे मनाया।
काशी विश्वनाथ गंगा तट ,
मोक्षदायिनी धाम बसाया।
मोक्ष को पाने जाते हैं जन,
शिव चरणों में मोक्ष है पाया।
त्र्यंबकेश्वर नासिक के पास,
गोदावरी मां कल-कल करती,
तीन मुख वाले शिवशंकर जी,
जहां से गोदावरी मैया बहती।
वैद्यनाथ झारखंड धरा पर ,
रावण ने भोले को मनाये।
काट-काट दश शीश दिए,
खुश हो शिवजी मुस्कुराए।
नागेश्वर नागों के स्वामी,
भक्तों के करते रखवाले ।
द्वारका धाम दारुका वनमें,
शोभित बैठे हो डमरु वाले।
रामेश्वरम समुद्र बीच सेतु ,
राम ने शिवलिंग स्थापित की।
पंडित रावण से पूजा करायें,
श्रीराम भक्ति से अर्पित की।
घृष्णेश्वर घृष्णा की भक्ति से,
शिव प्रकटे एलोरा के पास।
शिव कल्याण करें भक्तों पर,
भक्ति से करें श्रद्धा विश्वास।
बारहों ज्योतिर्लिंग में बसा हूं,
हर जगह हर कण-कण में।
जो सच्चे मन से मुझे पुकारे,
दौड़ा चला आऊं तत्क्षण में।
ज्योतिर्लिंग दर्शन करने से,
जीवन सफल हो जाएगा।
शिव करते कल्याण सदा ही,
चन्द्र का उद्धार हो जाएगा।
द्वादश ज्योतिर्लिंग दर्शन से,
मन को सुकून मिले हरबार।
हर हर महादेव के नारे से,
गूंज उठे जग में जयकार।
चन्द्रकला शर्मा
प्रधान पाठक
बेमेतरा छत्तीसगढ़




