अनोखा प्यारा शिव परिवार

अनोखा प्यारा शिव परिवार
कैलाश की बर्फीली चोटी पर,
शिव परिवार सबसे न्यारा है।
न महल है, न सोना-चांदी,
फिर भी जग से वो प्यारा है।
शिव के जटि में गंगा बहती,
माथे पर दूज के चंदा चमके।
गले में नाग, हाथ में त्रिशूल,
डमरू की धुन से सब ठूमके।
गौरी रूप, करुणा की मूरत,
घर की रौनक, घर की माया।
शक्ति का रूप दुर्गा कहलाए,
पार्वती मां शिवजी के छाया।
श्री गणेश,लंबोदर स्वामी,
एकदंत और बड़े कान है।
पहले पूजे जाते गणेश जी,
करते सबके काम आसान।
विघ्नहर्ता बुद्धि के देवता,
रिद्धि-सिद्धि वर दाता है,
मूषक करें सवारी सुंदर ,
मोदक खाकर मुस्काता है।
शक्ति के पुत्र, सेनापति वीर,
मोर सवारी, हाथ में भाला।
देवताओं की रक्षा करने वाले,
नाम कार्तिकेय गौरी के लाला।
नंदी,भृंगी द्वार पहरा देता,
शेषनाग गले की हार बना।
भूत-प्रेत,गण साथ में रहे,
ऐसा अनोखा परिवार बना।
ऊंच-नीच, नहीं कोई भेद है,
शिव परिवार सिखाता यही।
प्रेम, त्याग और एकता से ही,
शिव परिवार स्वर्ग लाता यही।
हर हर महादेव, माँ पार्वती जी
जय गणेश,जय कार्तिकेय जी।
शिव परिवार,अनोखा प्यारा ,
श्रद्धा भाव करें चन्द्रा अर्जी।
चन्द्रकला शर्मा
प्रधान पाठक
बेमेतरा छत्तीसगढ़




