रिश्तों में मधुरता

रिश्तों में मधुरता
रिश्ता फूल,मधुरता खुशबू,
दिखे नहीं महसूस होता है।
एक शब्द मीठा बोलो तो,
दिल हमेशा खुश होता है।
ना शिकायत,नही तकरार,
बस समझ प्रेम और प्यार।
इसी से तो रिश्ते चलते हैं,
सावन की बूंदों की फुहार।
माँ की डांट में भी अपनापन,
पिता की मर्यादा आशीर्वाद।
भाई का प्यार,बहन का दुलार,
मित्र की साथ सुकून की बात।
मां के हाथ के खाने में प्रेम,
पिता की सलाह में प्यार।
भाई बहन के लिए है त्याग,
एक दूजे में सरल व्यवहार।
कड़वे पल भी आते रहते,
मधुरता से सब घुल जाते हैं।
रिश्ता निभाना,रिश्ता बनाना,
मधुरता से रिश्ते खिल जाते है
शब्द मीठे तो मन भी मीठे,
व्यवहार मीठे तो रिश्ते मीठे।
रिश्तों में मिठास भरा हो तो,
कड़वाहट हो है जाते फीके।
रिश्ता नाजुक कांच समान,
क्रोध से रिश्ता टूट जाता है,
रिश्तों का संबंध अनोखापन,
कड़वे भाव से रूठ जाता है।
जहां अहम् नहीं, रिश्ता मीठा,
जहां तुलना नहीं,अपनापन।
ऐसा परिवार है स्वर्ग समान,
नही मतलब, नहीं स्वार्थीपन।
चन्द्रकला शर्मा
प्रधान पाठक
बेमेतरा छत्तीसगढ़




