आवव संगी मनाबोन,जूरमिल हरेली तिहार

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आवव संगी मनाबोन,जूरमिल हरेली तिहार
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आवव संगी मनाबोन,जूरमिल हरेली तिहार,
लीम के डारा खोंचत, करबोन जय जोहार,
नांगर-बखर कुदारी-रापा,करबोन उजियार,
आवव संगी मनाबोन,जूरमिल हरेली तिहार।
लोंदी खवाबो नून भर,पिसान सान पशुधन,
गाय-गरुवा लक्षमी,हरेली म हे ऊॅंखर जतन,
गेंड़ी चढ़बो रच-रच,बिजराबो बबा, ल यार,
आवव संगी मनाबोन,जूरमिल हरेली तिहार।
बईगा गुनिया बांधे,गाॅंव टारॅंय चपका-खुरहा,
सुन्ता-सलाह ले,रोका-छेंका हे गरुआ हरहा,
सेरचाऊॅंर के ओखी,गाॅंव के पहिली तिहार,
आवव संगी मनाबोन,जूरमिल हरेली तिहार।
बियासी-रोपा करके,सकेल ले नांगर बख्खर,
ठेठरी-खुरमी,गलगुहा,मांगत हे टूरा झेख्खर,
घरो घर ममहावत हे,ओसारी तेलई जोरदार,
आवव संगी मनाबोन,जूरमिल हरेली तिहार।
बईला दऊडावे,खुडवा खेले,फूगडी फूनाफून,
चटका बजावत राम गुन,गावत हे संझाकून।
टूरी-टनकी,दाई-माई,रामबती खो करैं गोहार,
आवव संगी मनाबोन,जूरमिल हरेली तिहार।
पाॅंव पैरी,कनिहा करधन,हाथ अईंंठी-पहुॅंची,
टोंटा टोंड़ा-पुतरी,कान खिनवा फभे गऊकी,
हरियर लुगरा,छत्तीसगढ़ महतारी के हे सार,
आवव संगी मनाबोन,जूरमिल हरेली तिहार।
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खुदेच लिखे मोरेच रचना संग
सुरेश कुमार बन्छोर “अभ्यर्थी”
हथखोज / देमार (पाटन)
तालपुरी भिलाई छत्तीसगढ़
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