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आषाढ़ की हरियाली

आषाढ़ की हरियाली

 

आषाढ़ आया लेकर के,सावन का शुभ समाचार ,

धरती ने हरियाली की सजी, ओढ़ी चादर विस्तार।

तपती धरा पर मेघ बरसे,आई

खेतों में जान है,

सूखे पेड़ों पर नई कोंपलें,कर

रही सम्मान है।

कागज की नाव चलाये,मेढक टर टर टर्राये।

मिट्टी की सोंधी महके,गली में कीचड़ छाये।

फसल देख किसानों के, चेहरे पर खुशहाली छाएं,

बीज लगे आषाढ़ की गोद में,

नन्ही फसल लहराए।

पीपल, बरगद नहाकर निखरे,

नदी,तालाब भरे हैं।

आषाढ़ की हरियाली देखो,

चारों तरफ बिखरे हैं।

हरियाली पत्तों की नहीं,मन

की है खुशहाली।

आषाढ़ की हरियाली फैले,ये

धरती की दिवाली।

आषाढ़ की हरियाली सुंदर, खेतों में लहराई,

धरती माता सुन्दरता देख, मन ही मन मुस्काई।

चन्द्रकला शर्मा

प्रधान पाठक

बेमेतरा छत्तीसगढ़

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