
गीत सृजन
मुखड़ा
रिमझिम बरसे मेघ रे, कुदरत की सौगात।
अब तो आजा साँवरे, कर लूँ दिल की बात।।
भीगी-भीगी धरा लगे, महके वन-उपवन।
मोर पिया को ढूँढ़ते, नाचे वन-आँगन।
पुरवा मधुर संदेश दे, जागे मन जज़्बात।
अब तो आजा साँवरे, कर लूँ दिल की बात।।
बूँद-बूँद में प्रेम है, झरता अमृत-रंग।
तेरे बिन सूना लगे, जीवन का हर संग।
नयनों में संजोए हुए, मिलन भरी बरसात।
अब तो आजा साँवरे, कर लूँ दिल की बात।।
बाँसुरी की तान पर, धड़के मेरा प्राण।
राधा-सा यह मन करे, तेरा ही गुणगान।
चरण-कमल की छाँव दे, मिट जाएँ आघात।
अब तो आजा साँवरे, कर लूँ दिल की बात।।
रिमझिम सावन गा रहा, प्रेम-भक्ति के छंद।
तन-मन अर्पित हो गए, टूट गए सब बंध।
दर्शन देकर पूर्ण कर, जीवन की हर आस।
अब तो आजा साँवरे, कर लूँ दिल की बात।।
स्वरचित
डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार



