सफल स्त्री से प्रेम —

सफल स्त्री से प्रेम ——- नारी को जिसने समझ लिया देवत्व उसे ही मिल पाता है।
एसा यूं ही तो नहीं कहा जाता है।
हर सफल आदमी के पीछे किसी औरत का हाथ जरूर पाया जाता है।
एसा भी तो सदा से ही सुना जाता है ।
एसा होता ही होगा।
किसी ने कहा है तो सत्य ही होगा।
परंतु ऐसा कहने वाले उस पुरुष का पुरुषोचित दंभ तो आड़े ना आया होगा?
स्वीकारोक्ति में जिस भी पुरुष ने भी सर हिलाया होगा।
ऐसा करके उसने अपने उच्च संस्कारों को ही दिखाया होगा।
इसके विपरीत यह भी तो निश्चित ही है कि
प्रत्येक महिला की सफलता के पीछे भी होता है पुरुषों का ही हाथ।
बहुत मुश्किल होता होगा पुरुषों का अपनी ही महिलाओं को खुद से ऊंचा उठते देखना।
किसी भी नारी को बंधन मुक्त करना।
उसके आगे बढ़ने में सहायक होना।
ऐसा करना किसी साधारण पुरुष के वश की बात नहीं।
सफल स्त्री से भी प्रेम करने वाला भी कोई साधारण इंसान नहीं।
उसमें जरूर कुछ दैवीय गुण होगा।
अहंकार रहित, नारी का सम्मान करने वाला,
नारी को बराबरी का दर्जा देने वाला,
वह पुरुष जरूर अर्धनारीश्वर, सबल शिव का रूप ही होगा।
देवत्व को उसने प्राप्त कर ही लिया होगा। मधु वशिष्ठ फरीदाबाद हरियाणा



