E-Paperसाहित्य रचना
शीर्षक:–धागा विश्वास का

विधा:– काव्य
शीर्षक:–धागा विश्वास का
मौसम सुहाना आया
पावन दिन है लाया
सौगात खुशियों का लाया
उत्साह भरा उल्लास भरा
है भाईबहन का दिन
त्योहार ये रक्षाबंधन।।
थाल सजाकर आई बहना
अक्षत चंदन रोली राखी
लेकर आई मिठाई बहना।।
प्यार का उपहार लेकर
रिश्ते सजाने आई बहना
रेशम के धागों से
संसार बाँधने आई बहना।।
न सोना न चाँदी का
न झूठ न दिखावे का
धागा है विश्वास का
श्रद्धा और प्रेम का
भाईबहन के प्यार का
त्योहार है रक्षाबंधन।।
बहना के मुस्कान का
भाई वचन के मान का
रक्षा और सम्मान का
रिश्तों के वरदान का
भाईबहन के शान का
त्योहार है रक्षाबंधन।।
कच्चे धागों का यह बंधन
हर बंधन से हैं मजबूत
न लालच न स्वार्थ का
ये बंधन है विश्वास का
भाव और जज्बात का
भाईबहन के साथ का
त्योहार है रक्षाबंधन।।
स्वरचित:–डॉ अनुपम भारद्वाज मिश्रा




