ओवरलोड ट्रकों पर कार्रवाई के दावों के बीच उठे सवाल, वायरल टीपी ने खोली पोल

ओवरलोड ट्रकों पर कार्रवाई के दावों के बीच उठे सवाल, वायरल टीपी ने खोली पोल
मैहर। जिले में ओवरलोडिंग के खिलाफ लगातार कार्रवाई के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन सड़कों पर दौड़ रहे ओवरलोड ट्रकों की तस्वीरें इन दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं। कार्रवाई के बावजूद धड़ल्ले से ओवरलोड ट्रकों का संचालन जारी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जिम्मेदार विभाग कुछ मामलों में कार्रवाई करता है और कुछ मामलों में चुप्पी क्यों साध लेता है?हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक खबर ने पूरे मामले को फिर चर्चा में ला दिया है। वायरल मामले में सामने आई टीपी में ही वाहन में लोड माल की मात्रा दर्ज बताई जा रही है, साथ ही जिस व्यक्ति/स्थान से माल लोड किया गया, उसका विवरण भी टीपी में अंकित बताया जा रहा है। ऐसे में सवाल यह है कि जब दस्तावेज ही कथित तौर पर ओवरलोडिंग की ओर इशारा कर रहा है तो जिम्मेदार अधिकारियों को कार्रवाई करने में आखिर किस बात की परेशानी है?
टीपी सामने, फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं?
ओवरलोड वाहन केवल यातायात नियमों का उल्लंघन नहीं करते, बल्कि सड़क सुरक्षा और सड़क की गुणवत्ता पर भी गंभीर असर डाल सकते हैं। यदि किसी वाहन के दस्तावेज में निर्धारित क्षमता से अधिक माल दर्ज है, तो संबंधित विभागों के पास मामले की जांच और नियमानुसार कार्रवाई करने का आधार मौजूद होना चाहिए। इसके बावजूद यदि ऐसे मामलों में कार्रवाई नहीं होती तो यह सवाल स्वाभाविक है कि क्या ओवरलोडिंग के खिलाफ कार्रवाई भी चयनात्मक तरीके से की जा रही है?
किसके संरक्षण में चल रहा खेल?
स्थानीय स्तर पर लंबे समय से ओवरलोड वाहनों के संचालन को लेकर सवाल उठते रहे हैं। कार्रवाई के बाद कुछ दिनों तक व्यवस्था सख्त दिखाई देती है, लेकिन फिर वही वाहन सड़कों पर ओवरलोड दौड़ते नजर आने लगते हैं।
अब सवाल जिम्मेदार अधिकारियों से है कि—
जब टीपी में माल की मात्रा स्पष्ट है, लोडिंग स्थल की जानकारी उपलब्ध है और मामला सोशल मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक हो चुका है, तो संबंधित वाहन, लोडिंग स्थल और जिम्मेदार व्यक्ति की जांच कर कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
क्या नियम सभी के लिए समान हैं या फिर कार्रवाई के नाम पर केवल चुनिंदा वाहनों को ही निशाना बनाया जा रहा है?
अधिकारियों की भूमिका पर उठ रहे सवाल
मामला सार्वजनिक होने के बाद अब निगाहें परिवहन और खनिज विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों पर टिकी हैं। यदि वायरल टीपी और वाहन की वास्तविक स्थिति में ओवरलोडिंग की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं यदि वायरल दस्तावेज में कोई तथ्य गलत है तो संबंधित विभाग को सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। अब सवाल सिर्फ ओवरलोड ट्रकों का नहीं, बल्कि कार्रवाई में कथित पक्षपात का है। जिम्मेदार अधिकारी स्पष्ट करें कि ओवरलोडिंग के खिलाफ उनकी कार्रवाई की कसौटी क्या है और वायरल मामले में अब तक क्या कार्रवाई की गई?





