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विश्वास के धागे

🎉🎉🎉विश्वास के धागे🎉🎉🎉

 

वट वृक्ष हों या फिर कोई शक्ति तंत्र- पीठ हो। 

धागें बांधता मनोकामना या ब्रह्म स्थान हो।।

 

यह प्यार और विश्वास का बंधन बहुत न्यारा। 

राखी बंधवाने आए, बहना का भाई प्यारा।।

 

देवासुर संग्राम में, स्वामी को इंद्राणी बांधी। 

चीर-हरण मुक्ति, द्रोपदी कृष्ण को बांधी।। 

 

बांधवाये रक्षा बंधन, ब्राह्मण से जहांगीर ने।

मेवाड़ रानी कर्णावती से बंधवाई हुमायूं ने।।

 

यह धागा रक्षा बंधन बने, अटूट विश्वास का।

रिश्ता मोदी और कमर मोहसिन शेख का।।

 

रक्षा बंधन ब्राह्मण- यजमान को बांधे।

बहना राखी बांध- स्वार्थ नहीं साधे।।

 

प्रेम- सौहार्दपूर्णता का शुभ ‘चिन्ह’ राखी।

भेद भाव का अंत करती आई यह राखी।।

 

अभिवावक अपने प्यारे संतान को बांधे राखी।

संतान अग्रजों को, स्नेहासिक्त हो बांधें राखी।।

 

गुरुजनों, मित्र; विश्वासपात्रों को, बांधे धागा।

जो रक्षा का वचन निभाए, उसको बांधें धागा।।

 

डॉ. कवि कुमार निर्मल

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