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जलकर में चक्रवृद्धि ब्याज पर रोक, फिर भी पुराने ब्याज की वसूली जारी

जलकर में चक्रवृद्धि ब्याज पर रोक, फिर भी पुराने ब्याज की वसूली जारी

 

कटनी। नगर निगम की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जलकर में चक्रवृद्धि ब्याज समाप्त किए जाने के बावजूद पुराने बकाया पर लगाए गए चक्रवृद्धि ब्याज की वसूली अब भी किए जाने का आरोप सामने आया है। इससे उपभोक्ताओं में नाराजगी है और नगर निगम की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

 

बताया जाता है कि पूर्व महापौर के कार्यकाल में जलकर पर लगने वाले चक्रवृद्धि ब्याज को समाप्त करने का निर्णय लिया गया था। इसके बावजूद लंबे समय तक नगर निगम द्वारा उपभोक्ताओं से जलकर के साथ ब्याज की राशि वसूल किए जाने की शिकायतें सामने आती रहीं।

 

वर्ष 2026 में समाजसेवियों और आम आदमी पार्टी से जुड़े लोगों द्वारा इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद नगर निगम ने जलकर व्यवस्था में चक्रवृद्धि ब्याज को समाप्त करते हुए 5 प्रतिशत ब्याज की व्यवस्था लागू की। लेकिन सवाल यह है कि जब चक्रवृद्धि ब्याज पर रोक लगाई जा चुकी है तो पूर्व में लगाए गए चक्रवृद्धि ब्याज की राशि की वसूली किस नियम के तहत की जा रही है?

 

50 प्रतिशत छूट का भी उठ रहा सवाल

 

नगर निगम द्वारा जलकर के बकायादारों को राहत देने के लिए 50 प्रतिशत तक छूट का प्रावधान किया गया है। हालांकि, यदि उपभोक्ता के पुराने बकाये में चक्रवृद्धि ब्याज जोड़कर राशि निर्धारित की गई है और उसी राशि पर छूट दी जा रही है, तो वास्तविक राहत कितनी है, यह भी जांच का विषय है।

 

उपभोक्ताओं का कहना है कि पहले गलत तरीके से जोड़ी गई ब्याज राशि को हटाए बिना उस पर छूट देना राहत की बजाय उलझन पैदा करता है। निगम को स्पष्ट करना चाहिए कि पुराने जलकर खातों में किस अवधि का कितना मूल बकाया है और उस पर कितना ब्याज लगाया गया है।

 

नियमों की पारदर्शिता पर सवाल

 

नगर निगम की ओर से जलकर में ब्याज संबंधी नियमों को लेकर स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं किए जाने से उपभोक्ताओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। लोगों की मांग है कि प्रत्येक जलकर खाते में मूल राशि, साधारण ब्याज, पूर्व में लगाए गए चक्रवृद्धि ब्याज तथा वर्तमान में देय राशि का अलग-अलग विवरण दिया जाए।

 

अब देखना यह होगा कि नगर निगम पुराने चक्रवृद्धि ब्याज की वसूली को लेकर क्या स्पष्टीकरण देता है और उपभोक्ताओं को वास्तविक राहत कब मिलती है। फिलहाल इस पूरे मामले ने नगर निगम की कार्यप्रणाली और जलकर वसूली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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