पावन सावन

पावन सावन
बारह महीनों में सबसे न्यारा,
सावन भोले को अति प्यारा।
बेलपत्र, भांग,धतूरा दूध, चढ़े,
शिव पर पड़े जल की धारा।
सोमवार का व्रत जो करते,
मनवांछित वरदान को पाते।
कावड़िए गंगाजल भर लाते,
जयकारों से नभ गूंज जाते।
धरती ओढ़े हरियाली चादर,
इंद्रदेव बरसाए अमृत धारा।
खेतों में लगे फसल सुनहरी,
सावन दे खुशी की फव्वारा।
सावन महिमा सबसे भारी।
शिव को सच्चे दिल से ध्याए,
शिव कृपा सावन सा बरसे,
भवसागर से पार हो जाए।
सावन आया, खुशियाँ लाया,
शिव भक्तों का मन हर्षाया।
झिमिर-झिमिर बरसे बादल,
हर दिल में शिव भक्ति छाया।
मिट्टी की सोंधी खुशबू में,
शंकर का नाम रमाया है,
सावन की हर एक बूँद में,
भोले का रूप समाया है।
काले मेघा, झड़ी लगाओ,
सावन में शिव को मनाओ।
झूले पड़े हैं आम के डाली,
सख री सावन गीत गाओ।
मेंहदी हाथ, बिंदी माथ में,
सोलह श्रृंगार खूब सुहाए,
भोलेनाथ की महिमा से,
सबका मन अति हरषाए।




