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आया सावन गंगा जल चढ़ा ले

   (भजन/भक्ति रचना)

आया सावन गंगा जल चढ़ा ले

     (भजन/भक्ति रचना)

 

आया सावन गंगा जल चढ़ा ले,

कैलाशपति महादेव को मना ले!

कुछ कर ले मन, कुछ कर ले तू,

पावन दर्शन से भाग्य चमका ले!

आया सावन गंगा जल………

 

शिव जटा में लहराती गंगा मैया,

गंगा शिव में बहुत स्नेह है भैया।

गंगा जल से शिव होते हैं प्रसन्न,

इस शुभ अवसर का लाभ उठा ले!

आया सावन गंगा जल……..

 

भोलेनाथ की महिमा अपरंपार है,

सावन में भक्तों का बेड़ा पार है।

शिव के चरण शरण में चला जा,

जीवन में कुछ पुण्य तो कमा ले।

आया सावन गंगा जल…….

 

शिव का डमरू बज रहा डम डम,

नंदी बाबा नाच रहे हैं छम छम।

ऊपर त्रिशूल चमक रहा चम चम,

शिव शक्ति की गंगा में नहा ले!

आया सावन गंगा जल……..

 

प्रमाणित किया जाता है कि यह रचना स्वरचित, मौलिक एवं अप्रकाशित है। इसका सर्वाधिकार कवि/कलमकार के पास सुरक्षित है।

 

सूबेदार कृष्णदेव प्रसाद सिंह,

जयनगर (मधुबनी) बिहार/

नासिक (महाराष्ट्र)

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