E-Paperसाहित्य रचना

शीर्षक -हरियाली अमावस्या की खुशियाँ

विधा-गीत सृजन

शीर्षक -हरियाली अमावस्या की खुशियाँ

विधा-गीत सृजन 

 

मुखड़ा—

हरियाली अमावस आई, धरती दुल्हन-सी मुस्काई।

नीम, पीपल, बरगद झूमे, खुशियों की फुहारें लाई।।

 

काली बदरी नभ में छाई, रिमझिम बूँदें बरसाए,

सूखी धरती तृप्त हुई है, मन में नव उल्लास जगाए।

बीज नए अंकुरित हुए हैं, हर डाली हरषाई,

हरियाली अमावस आई, धरती दुल्हन-सी मुस्काई।।

 

आँगन में तुलसी महके, उपवन में फूल खिले हैं,

पंछी अपने मधुर स्वरों में, नव जीवन के गीत मिले हैं।

पेड़ लगाएँ, वृक्ष बचाएँ, यही प्रकृति की भलाई,

हरियाली अमावस आई, धरती दुल्हन-सी मुस्काई।।

 

माटी की सौंधी खुशबू ने, मन को खूब लुभाया,

हरित चुनरिया ओढ़ धरा ने, सुंदर रूप सजाया।

जल-जंगल और जीव बचाएँ, यही हमारी कमाई,

हरियाली अमावस आई, धरती दुल्हन-सी मुस्काई।।

 

आओ मिलकर आज लगाएँ, पौधे घर-घर प्यारे,

छाँव मिलेगी आने वाली, पीढ़ी को ये सहारे।

धरती माँ की सेवा करके, जीवन बने सुखदाई,

हरियाली अमावस आई, धरती दुल्हन-सी मुस्काई।।

 

स्वरचित 

डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’

मुजफ्फरपुर, बिहार

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!