रैगांव विधानसभा के अंतर्गत रैगांव थाना में ही के कुछ पुलिसकर्मी सीधे तौर पर लोगों से घूंस की मांग करते हैं…

रैगांव विधानसभा के अंतर्गत रैगांव थाना में ही के कुछ पुलिसकर्मी सीधे तौर पर लोगों से घूंस की मांग करते हैं…
वैसे तो अक्सर रैगांव विधानसभा क्षेत्र में कुछ ना कुछ सरकारी विभागों में होता ही रहता है!
लेकिन देशभक्ति जन सेवा जो किसी भी थाना में लिखा रहता है लेकिन उसके अंदर बैठे पुलिसकर्मी देश भक्ति और जन सेवा तो बहुत दूर है अगर कोई रिपोर्ट लिखवाने जाता है तो यह अनैतिक बातें करके जबरदस्ती फरियादी को भगा देते हैं!
यह बात सतना जिले के रैगांव थाना की है, जहां फरियादी अपनी रिपोर्ट लेकर जाता है तो अपराधी को छोड़कर फरियादी से ही वहां रिपोर्ट दर्ज करने वाले मुंशी मुकेश त्रिपाठी जी डायरेक्ट मना कर देते हैं कि हमारे थाना प्रभारी ने बोल रखा है और आदेश दे रखे हैं कि रिपोर्ट जब तक मैं ना रहूं तब तक किसी की नहीं लिखना!
इसका मतलब क्या है अगर थाना प्रभारी 10 दिन की छुट्टी में चले जाएंगे तो वहां बाकी के पुलिसकर्मी थाने में ताला बंद करके 10 ,12 दिन की छुट्टी मनाएंगे!
वर्तमान में रैगांव थाने में रिपोर्ट लिखने वाले मुंशी मुकेश त्रिपाठी हैं, और उन्होंने ग्राम शहपुरा से थाना पहुंचने वाली महिला कम से कम अपने घर परिवार के सदस्यों को लेकर छह बार रिपोर्ट दर्ज करवाने जा चुकी हैं, और आज भी रैगांव थाना गई थी लेकिन मुकेश त्रिपाठी जबरदस्ती फालतू की बातें करके भेज देते हैं और यह दिलेरी से कहते हैं कि मैं रिपोर्ट नहीं लिखूंगा अब सवाल उठता है कि ऐसे लोगों को लाइन अटैच नहीं पूर्ण कालिक सेवा समाप्त कर देनी चाहिए ! मुकेश त्रिपाठी के शब्द भी इसी तरह है जो करना हो कर लीजिए !
वह महिला अपने बच्चे की ही रिपोर्ट करने जाती है क्योंकि वह पूरे घर को परेशान तो करता ही है साथ ही साथ कुल्हाड़ी या चाकू से भी करने की कोशिश करता है और पूरे घर में रखे हुए सामान की तोड़फोड़ करता है !यह पूरी बातें इस महिला द्वारा बताई गई!
लेकिन जब वे अपने रैगांव थाना में उसके प्रति रिपोर्ट लिखवाने जाती है तो मुकेश त्रिपाठी रिपोर्ट लिखने से तुरंत मना करते तो है ही ऊपर से वह मुंशी गिरी भूल कर सरपंच और पटवारी भी बन जाते हैं! आज फिर वह महिला रैगांव थाना अपने बच्चों की अनैतिक गतिविधि को देखकर रिपोर्ट दर्ज करने गई थी लेकिन आज भी मुंशी मुकेश त्रिपाठी ने उनकी रिपोर्ट दर्ज करने से मना कर दिए ! उनसे पूछने पर उनका एक ही शब्द है कि हमारे टीआई साहब जब तक नहीं बोलेंगे तब तक हम रिपोर्ट दर्ज नहीं करेंगे पता नहीं मुकेश त्रिपाठी जी पुलिस में कैसे भर्ती हो गए इन्हें ना कानून का ज्ञान है ना संविधान का! कानून प्रवर्तन
फरियादी और अपराधी दोनों को लूटने की कोशिश करते हैं रैगांव मुंशी मुकेश त्रिपाठी! हम रैगांव के थाना प्रभारी को नहीं जानते कि वह अपने पुलिस कर्मियों से क्या बोलकर रखे है लेकिन यह बात तो निश्चित है किसी भी थाने के थाना प्रभारी रिपोर्ट लिखने से अपने पुलिसकर्मी व मुंशी जी को ऐसा नहीं बोलते होंगे क्योंकि यह कानूनी और संवैधानिक रूप से बहुत बड़ी बात हो जाती है ! जैसा कि हम पहले लिख चुके हैं कि मुंशी मुकेश त्रिपाठी सरपंच और पटवारी बन जाते हैं इसका मतलब है वह रिपोर्ट दर्ज नहीं करते और फरियादी को ही जबरदस्ती की बातों पर फंसा कर बेज्जती करने की भी कोशिश करते हैं ! मतलब अगर मुंशी मुकेश त्रिपाठी के पास फरियादी भी अपनी रिपोर्ट दर्ज करवाने जाए तो अपने जेब में पैसा लेकर जाना पड़ेगा वरना रैगांव थाना के पुलिसकर्मी ढंग से फरियादी की बातों को ना सुनते हैं ना गौर करते हैं और ना ही एक्शन लेते हैं!
और सबसे अमानवीय बात मुंशी मुकेश त्रिपाठी की तो यह है की रिपोर्ट दर्ज करने के अलावा वह बोलने लगते हैं की अपने बच्चों को नशा करने दीजिए उसके नाम पर भी जमीन है उससे आपको क्या मतलब ऐसे मुंशी मुकेश त्रिपाठी रैगांव में पदस्थ हैं!
सतना एसपी को इस जानकारी के मिलते ही रैगांव थाना के मुंशी या प्रभारी के प्रति ठोस कार्यवाही करना चाहिए क्योंकि अपने चक्कर में मुंशी जी थाना प्रभारी का भी नाम लगा रहे हैं !
पैसे की लालच में उनका दिमाग भी कीड़ा घुसा है कि हमें फरियादी और अपराधी दोनों से पैसे चाहिए और यह बात सबूत और उदाहरण सहित है




