
समय का पहिया
समय का पहिया घूमता है,
ना रुके कभी, ना थकता है।
पल में राजा को रंक बनाए,
पल में रंक, राजा बनता है।
राजमहल भी टूट जाता है,
झोपड़ी महल में ढल जाता है
कल अपनों पर हंसता था जो,
आज वह तन्हा रह जाता है।
कल जो रोते रहे जीवन में,
आज वही खूब हंसता है।
जो कल मांग रहा था भीख,
आज दान वही करता है ।
समय किसी का सगा नहीं,
नहीं मित्र न दुश्मन,रहता।
जो समझ गया नैया है पार,
समझा नहीं वो पीछे रहता ।
आज का सूरज कल आयेगा,
कहीं धूप कहीं छांव लायेगा ।
मौसम भी बदलता रहता है,
कभी सूखा,या सावन लायेगा।
पेड़ लगाओ तो छांव मिलेगी,
कर्म करोगे भाग्य खिलेगी।
सही कर्म का फल भी सही,
बुरे कर्म से दुःख कष्ट मिलेगी।
समय का पहिया घूमता रहता,
कर्म का फल भोगना पड़ता।
जो भी बोओगे वहीं काटोगे,
यही समय का चक्र है चलता।
चन्द्रकला शर्मा
प्रधान पाठक
बेमेतरा छत्तीसगढ़




