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अंगूर की बेटी

अंगूर की बेटी

 

तुम प्रीत इतनी क्यो करते हो

अंगूर की बेटी से

वह तो हैएक मीठी छूरी

जो हर एक भोले भाले को

अपने गिरफ्त मे कस लेती

पहले तो हंस हंस के

पिलाती जाम अपने नाम से

बडी उमंगे

बडी तंरगे

उडती है सिर्फ नाम से

आकर्षण से ही

खीचे बन्धे आ जाते

कितने पास तेरे

हंसी हंसी मे पी कर बन जाते

है बदनाम 

बदनाम होने का गम 

फिर डूबो देती

अंगूर की बेटी मे

यह ऐसी है हरजाई 

तुमको सिखला देगी बेवफाई 

बदनाम कर देगी

प्रीत निभाते हो क्यों अंगूर की बेटी से

बीबी रूठ के मैके चली जायेगी

लौट के न आयेगी

रह जाओगे

तुम अकेले

तब और भी

गम सालेगे

डूबोगे तब तुम और 

फिर अंगूर की बेटी मे

तेरे बच्चे 

हो जाये बदनाम 

शराबी के बच्चे कहलाये

कैसे तुम संभालोगे तुम उनको

संस्कार कहा से लाओगे

तुम तो खुद बेधर वार 

हो जाएगे क्योकि 

सब पैसे अंगूर की बेटी को

सप्रेम भेट चढाओगे

मेरा कहा मानो

तुम छोड दो

प्रीत लगाना

अंगूर की बेटी से

 

 

नीलम प्रभा सिन्हा

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