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विनम्र श्रद्धांजलि

विनम्र श्रद्धांजलि

 

श्रद्धेय डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम जी को समर्पित

 

ईश्वर की सुंदर बगिया में,

थे वे पुष्प सुगंधित, न्यारे।

महका जिनसे सारा जग,

कलाम थे सबके प्यारे।

 

अन्वेषण के पथ पर चलकर,

नित नए अनुभव अपनाए।

व्यर्थ बातों से दूर रहे,

मधुर मुस्कान सदा बिखराए।

 

स्वधर्म का पालन करते,

सर्वधर्म का मान बढ़ाया।

असंभव को संभव करके,

भारत का गौरव कहलाया।

 

मानव-मन पर राज किया,

विद्यार्थियों पर स्नेह लुटाया।

सम्मानित सर्वोच्च पद पाकर,

राष्ट्र का गौरव और बढ़ाया।

 

हम सब आज संकल्प करें,

उनके सपनों को साकार करेंगे।

उनके जीवन के हर संदेश को,

अपने कर्मों में उतारेंगे।

 

कर्मयोगी उस पावन आत्मा ने,

जब थामी जीवन की गति।

धरती पर बीज बिखेर गए,

ज्ञान, संस्कार और प्रगति।

 

हर कर्म राष्ट्र को अर्पित था,

समर्पण जिनकी पहचान।

ऐसे महान तपस्वी को,

नत होकर करें प्रणाम।

 

इस महान आत्मा को,

शत-शत नमन, शत-शत प्रणाम।

शांति के अमर दूत को,

बारंबार हमारा सलाम।

 

— अमिता मराठे

लेखिका एवं समाज सेविका 

इंदौर मध्य-प्रदेश

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