आया सावन पावन मास

आया सावन पावन मास
काली घटा घिर-घिर आई, सावन आया द्वार में,
धरती मां की गोद में उतरे, हरी-भरी बयार ले।
मेंढक टर-टर गाने लगे, कुहू कुहू कोयल बोले,
खुशियां मन के अंदर छाये, पेड़ों पर लगे झूले।
सावन का महीना पावन, शिव का प्यारा मास है,
भोले के सिर पर गंगा, बेलपत्र शिव को खास है।
कांवड़िए हरिहर के नाम से, बम-बम करते जाएं,
भक्ति की गंगा हर मन में, प्रेम की धारा बहाएं।
पानी बरसे जोरों से ,उफान उठने लगी नदियां,
खेतों में लहराए फसल, चेहरे पर छाई है खुशियां।
सखियां झूला झूलें डाल पे, गीत सावन के गाएं,
महावर-मेंहदी हाथों में सजे सावन के रंग लाएं।
रिमझिम फुहारों में भीगे,पेड़, पौधे, डाल,पात,
प्रकृति भी पूजा करे, ये सावन की मिली सौगात।
पावन मास ये सावन, शीतल करे तन-मन भरपूर,
शिव-भक्ति और हरियाली, दोनों संगम के सूर।
आया सावन पावन मास,मन में खुशियां लेकर साथ।
भोले की कृपा बरसे,बढ़े भक्ति श्रद्धा विश्वास।
चन्द्रकला शर्मा प्रधानाध्यापिका छत्तीसगढ़




