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रिमझिम-रिमझिम गीत सावन के

रिमझिम-रिमझिम गीत सावन के

 

सावन की रिमझिम में

तुझको ही मैं ढूँढ़ूँ।

आ जा प्रियतम, जहाँ भी हो,

मेरे पास अब आ जा।

 

मन मेरा व्याकुल हो जाता है,

जब तुझको मैं देख न पाऊँ।

प्रीत निभाने, मेरे हमसफ़र,

अब तो लौट के आ जा।

 

बदरा छा गए सावन के,

झूले पड़ गए डालों पर।

प्रकृति ने ओढ़ी हरियाली,

तू भी मिलने आ जा।

 

बोलो प्रियतम, कैसे कटेगी

तेरे बिन यह सावन की ऋतु?

हर पल तेरी राह निहारूँ,

अब तो आ जा।

 

गीत सावन के गूँज रहे हैं,

रिमझिम बरसे मेघ।

मेरा मन भी है दीवाना,

भीगी-भीगी इन रातों में

बस तेरा ही इंतज़ार करे।

 

पूरब से आती शीतल हवाएँ

तेरे प्यार की खुशबू लाती हैं।

दिल मेरा बेचैन हो उठता है,

कैसे करूँ मैं तुझसे बातें?

जाग-जागकर तेरी राह तकूँ,

हर आहट पर तेरा नाम पुकारूँ।

 

याद आती हैं वे पिछली

सावन की मधुर फुहारें।

रिमझिम बरसती वर्षा में

बीते वे मधुर पल,

आँखों में मोती बनकर

आँसू छलक उठते हैं।

 

सावन के इन रिमझिम गीतों में

मैं तुझको ही खोजती हूँ।

मन की हर धड़कन कहती है—

प्रियतम! अब तो आ जा।

 

तेरे बिना यह सावन भी

सूना-सूना लगता है।

तेरे संग ही हर ऋतु

मधुमास बन जाती है।

 

आ जा प्रियतम, देर न कर,

मेरी प्रीत को स्वीकार कर।

रिमझिम-रिमझिम बरसते सावन में

अपने प्रेम का उपहार दे जा।

 

मैं तेरी राह निहार रही हूँ,

पल-पल तेरा नाम पुकार रही हूँ।

सावन की हर बूँद यही कहती है—

प्रियतम! अब तो आ जा।

 

— नीलम प्रभा सिन्हा

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