श्रृध्देय मुंशी प्रेमचंद जी की जयंती पर

नमन मंच
दिनांक 31.7.26
श्रृध्देय मुंशी प्रेमचंद जी की जयंती पर
शीर्षक
शब्द पुष्पांजलि
साहित्य कला जगत के
दैदीप्यमान ज्योतिपुंज थे।
समाज को उजाला देते
श्रेष्ठ पथ प्रदर्शक सन्त थे।
हम सब मिलकर स्नेह से
करें शब्द पुष्पांजलि अर्पित।
आंधी करुणा आंधी भक्ति
धूर्त वृत्ति अज्ञानता में
जन समाज विचरण करें।
तब गोदान जैसा उपन्यास
निर्मला जैसी कहानियां
चोट करती आंधी श्रृद्धा पर।
जीवन भी कितना अजूबा
कभी दुखों के झरने बहते
जो खुशियों के झोंके आते।
अल्पकाल में धूम मचाते
दारुण चित्र उकेरते मुंशीजी
आधार लेते कोरे कागज का
यथार्थ की पहचान करते
बुराइयों का उपचार करते
ज़िन्दगी में नहीं देखें सपने
सद्ज्ञान सच्ची भावनाओं से
हर दर्द को उजागर करते।
कहते सदा रहो मुस्कुराते।
प्रेमचंद की आहे कलम से
साहित्य की विधाओं में रचते
दर्पण का रूप धारण करके
समाज को जागरूक कर देते।
लोक नायक,भारत भू के
महान साहित्यकार प्रेमचन्द जी थे।
शत् शत् नमन ।
अमिता मराठे
लेखिका एवं समाज सेविका
इंदौर मध्यप्रदेश




