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गुरु :–

गुरु :–

 

सच्चे गुरु ही तो बच्चों की तकदीर बनाते है।

कोरे कागज पर सतरंगी तस्वीर बनाते है।

 

तुम ही थे गुरु वशिष्ठ और तुम ही विश्वामित्र। 

गार्गी, द्रोणाचार्य और चाणक्य सा चरित्र।

समाज के आदर्श,तुम्हारा दामन पाक पवित्र। 

तुम ही हो नन्हें-नन्हें बच्चों के सच्चे मित्र। 

 

गुरु ही बच्चों के हाथों की लकीर बनाते है।

कोरे कागज पर सतरंगी तस्वीर बनाता है।

 

सबके लिए श्रद्धा और विश्वास तुम ही हो।

भारत माता की हर सम्भव आस तुम ही हो। 

ज्ञान-विज्ञान की सुमधुर सी सुवास तुम ही हो ।

नवयुवकों के व्यक्तित्व का विकास तुम ही हो। 

 

अज्ञान के विषपान को मीठा नीर बनाते है। 

कोरे कागज पर सतरंगी तस्वीर बनाते है।

 

हमारे देश का तुमसे जिंदा है लोकतंत्र । 

वतन के विकास का तो ज्ञान ही है मूलमंत्र । 

नौनिहालों का भविष्य का गुरु ही सयंत्र है। 

कर्तव्यों का ज्ञान देना है सच्चा प्रजातंत्र । 

 

बच्चों को सच्ची राह दिखा प्रवीर बनाते है। 

कोरे कागज पर सतरंगी तस्वीर बनाते है।

 

सुभाषिनी जोशी ‘सुलभ’

इन्दौर मध्यप्रदेश

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