E-Paperसाहित्यिक गतिविधियां

शीर्षक: पहली बारिश

 

शीर्षक: पहली बारिश

डॉ. अंजली सामंत

 

पहली बारिश आते ही सारे रंग धुल जाते हैं।  

कीचड़ में खेलना, कूदना – वही तो हमारा बचपन था।  

माँ, तेरे पल्लू में बँधी है तेरी सारी यादें ||1||

 

मेरे लिए नई किताबें, रेनकोट लाना तेरा फर्ज था।  

एक-एक पैसा जोड़-जोड़कर बचाना तेरा फर्ज था।  

हमें पढ़ा-लिखा बनाना – तेरा सपना था ||2||

 

खेत कर के घर को संभाला था

तेज़ बारिश, कड़कती बिजली में भी  

सिर पर बस्ता रखकर हमें स्कूल छोड़ने जाना तेरा ||3||

 

अँधेरे कमरे में, टूटी बेंच पर  

तेरे हाथ की रोटी-सब्ज़ी खाना सबसे मीठा लगता था।  

हमारी पढ़ाई के लिए तूने बहुत दुख झेले।  

अपने लिए कभी नई साड़ी नहीं ली।  

फटे-पुराने कपड़ों में ही खुश रही तू ||4||

 

हर पल भगवान को याद करती थी तू।  

जो भी माँगा, बस अपने बच्चों के लिए माँगा।  

आज बच्चे बड़े हो गए हैं।  

 सब सुख है ||5||

 

पर पहली बारिश आते ही मन के सारे रंग बह जाते हैं।  

माँ, तेरी यादों की बारिश फिर बरस जाती है।  

तेरे साथ बिताया हर पल आज भी रुलाता है ||6||

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!