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मत करना अभिमान

मत करना अभिमान
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सफ़र जिंदगी का नहीं, होता है आसान।
कुछ भी पंथ कठिन नही, चलने की लो ठान।।आए बनकर भूमि पर, हम सभी मेहमान।
निज कर्मों से सृष्टि में, सदा बढ़ाओ मान।।बच्चे, बूढ़े या युवा, सबको दो सम्मान।
यह जीवन दो रोज का, मत करना अभिमान ।।खुशियां बांटे और में, अक्सर जो इंसान।
उसके अधरों पर सदा, ईश रखे मुस्कान।।खिल्ली उड़ाये और की, वह न कहाय महान।
वही कहाये श्रेष्ठ जो, दे दे क्षमादान।।
लेखिकाममता साहू शिक्षिका
कांकेर छत्तीसगढ़




