विषय:-आज़ादी के दिवाने

१३/०८/२६, गुरुवार विषय:-आज़ादी के दिवाने
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आज़ादी के हम दिवाने !
कफ़न बांध कर आए हैं।
अपने लहू की स्याही से
तुमको रंगने आए हैं।
वीरों की मंत्र वंदे मातरम्
उसे जगाने आए हैं।
लिखी शहीदों ने अमर कहानी
वही बताने आए हैं।
भुल रहे जो वीर गाथा को
याद दिलाने आएं हैं।
आज़ादी के हम दिवाने!
अलख जगाने आए हैं।
हृदय की आकुलता का बंद द्वार खोलने आएं हैं।
आज़ादी का अर्थ तो समझो!
बलिदान और त्याग को समझो !
आज़ादी आज़ादी चिखते…
झंडा लेकर हम निकलते ।
चौक , चौराहों पर घूमते ।
विद्यालय ऑफिस में समारोह मनाते ।
राष्ट्रगान गाकर आ जाते…
एक दिन का राष्ट्र भक्ति दिखलाते ।
राष्ट्रभक्ति का भाव जगाते ।
आज़ादी के हम दिवाने.. एक दिन भाव संग राष्ट्र प्रेम सद्भाव जगा लो…
वीरों की वीरगाथा की भाव हृदय में भर लो…
आज़ादी के सब देशभक्त दिवाने…
भूल जाते अगले ही दिन…
कहां गया देशभक्ति …
कहां गया तिरंगा प्यारा…
सादा सच्चाई का कहां गया..
कहां गया केसरिया ….. प्यारा…?
आज़ादी के देशभक्त दिवाने!
आजादी मनाने आए हैं।
सोते युवा में वीरों की गाथा की अलख जगाने आएं है।
अमर जवान की अमर ज्योत को प्रज्जवलित करने आएं हैं ।
आजादी के देशभक्त दिवाने !
अपने सर पर केसरिया बांध कर आएं हैं।
अपने राष्ट्र की सेवा में अपना प्राण न्यौछावर करने आएं हैं।
वीरों के पथ पर चलने आए हैं।
आज़ादी के दिवाने !
देश पर मर मिटने आए हैं।
जो शहीद हुए हैं …उनकी जरा याद करो कुर्बानी….
वन्दे मातरम् के मंत्रों को याद दिलाने आए हैं।
जय हिन्द, जय भारती का गुणगान करने आएं हैं।
आजादी के दिवाने !
अपने विजयी ध्वजा को सदा ऊंचा लहराते देखने आएं है ।
🙏🏻🇮🇳🙏🏻
✍🏻 श्यामा प्रभाकर दास
मुंबई




