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रक्षा बंधन

रक्षा बंधन

 

भाई-बहन के प्रेम की अबूझ पहेली,

रक्षा बंधन है अटूट प्रेम की कहानी।

स्नेह से खिलखिलाती बचपन की अनमोल कहानी,

जब लड़ते थे, झगड़ते थे छोटी छोटी बातों पर ही।

 

आज फिर यादें लेकर आई वह

मधुर क्षण बचपन के,

रक्षा बंधन वह पावन दिन, जब बहन लगाती

भाई के माथे पर टीका, अक्षत और करती आरती।

हाथों में बाँधती प्यार से रेशम के धागे, राखी की।

 

भाई प्रेम से गले लगते, देते नेग प्यारी-प्यारी,

राखी के बदले में बहना की रक्षा का भार उठाते।

जीवन की अंतिम घड़ी तक अपनी

बहन की रक्षा का संकल्प निभाते।

 

आज बहना दूर देश बैठी,

आँखों में आँसू लिए पोस्ट से भेजती राखी।

भाई बहन का प्यार कम न होगा कभी,

लगा लो बंधन, चाहे दूरी कितनी भी हो।

यही है प्यार, रक्षा बंधन की कहानी।

 

— नीलम प्रभा सिन्हा

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