विषय: गाँव की बाढ़

विषय: गाँव की बाढ़
_डॉ. अंजली सामंत
गाँव में दो-चार दिन से लगातार बारिश हो रही थी।
बारिश की वजह से बाढ़ आ गई थी।
स्कूल बंद थे, पाँच-छह गाँव पानी में डूब गए थे।
लोग ऊँची जगहों पर जाकर बैठे थे॥1॥
दोपहर को बारिश थम गई।
हम बच्चों ने माँ से कहा – “चलो, बाढ़ देखने चलते हैं।”
हमारे साथ काम वाले चाचा और माँ भी आए॥2॥
घर से दूर चलकर हम बाढ़ के पास पहुँचे।
लाल और गाढ़ा पानी तेज़ी से बह रहा था।
बड़े-बड़े पेड़-पौधे पानी के साथ बहते जा रहे थे।
पानी की गर्जना कानों में गूँज रही थी।
हमने पहली बार प्रकृति का ये भयानक रूप देखा॥3॥
पेड़ों के ऊपर ज़हरीले साँप लिपटे थे।
कुत्ते, गायें तैरकर किनारे आने की कोशिश कर रही थीं॥4॥
तभी अचानक एक शव तैरता हुआ आया।
उसे देखते ही मैं वहीं बेहोश हो गई।
सबने मुझे संभाला, बिठाया।
मैं बुरी तरह डर गई थी॥5॥
रातभर सपने में वही डरावना शव दिखाई देता रहा।
बुखार आ गया, बड़बड़ाने लगी।
नानी और माँ ने रातभर नमक की पट्टियाँ रखकर बुखार उतारा।
पूरे सात दिन तक गाँव बाढ़ में डूबा रहा॥6॥
आज भी बरसात के दिन आते हैं,
तो वो मंजर आँखों के सामने तैर जाता है।
और मैं चीख-चीख कर माँ को पुकारती हूँ॥7॥




