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कटाक्ष

कटाक्ष

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हंसते हंसते करते हैं लोग छोटी सी कटाक्ष !!

बुरा लगा तो कहते हैं ये तो है मजाक !!

किसी की कभी उड़ाते खिल्ली !!

जैसे जलती है माचिस की तिल्ली !!

फर्क कुछ उनको पड़ता नहीं बस! यूं गुजरता दिन – रात ।

मुस्किलें बढ़ जाती है तभी

घटना बन जाए कोई छोटी सी कटाक्ष !!

क्या कहोगे …. ?

घटना को भी मजाक….

करने से पहले सोचों ….

बोलने से पहले सोचों ….

एक छोटी सी शब्द भी देती है हृदय को घाव !!

एक छोटी सी शब्द भी बन जाती किसी की सफलता का पड़ाव !!

शब्दों को नाप तौल कर बोलों नहीं तो होगा द्रौपदी सा परिणाम…

अंधे का पुत्र अंधा ये भी भा कटाक्ष !!

महाभारत रच बैठा ये कटाक्ष सा मजाक !!

हंसते हंसते करते हैं लोग छोटी सी कटाक्ष !!

बुरा लगा हृदय को तो कहते हैं मजाक !!

कटाक्ष तो कटाक्ष ही होती !!

ये नहीं मजाक !!

जो हृदय को दुखी करे तो कैसा मजाक !!

रोते हृदय को हंसा दे…! 

रुके हुए को चला दे…. !

हार को जीतना सीखला दे ….! !

निर्बल को हौसला दे….!!

ऐसी प्रेरणा बनो, नहीं करो कटाक्ष !!

बुरा लगे जो हृदय को वह नहीं मजाक !!

वह नहीं मजाक …!!

✍🏻 श्यामा प्रभाकर दास

        मुम्बई

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