E-Paperसाहित्य रचना

डोर ये मेरे स्नेह का

डोर ये मेरे स्नेह का

कभी टूटने ना देना…

संस्कार मे मेरे जीवन का

कभी बुझने ना देना….

बंधन है ये अनमोल रिश्तों का

इस कच्चे सूत को बांध लेना…

राखी तो एक प्रेम का धागा है

पर वचन निभाते रहना…..

तेरे भाल पर हर वर्ष ये विजय तिलक सजता रहे।

मेरा सौभाग्य तेरा भाग्य यूं ही बना रहे।

भाई – बहन का अटूट प्रेम बंधन लाल रंग से पवित्र बना रहे।

ये आशीष दे रही है तेरी बहना !

अपने स्नेह के बंधन में सदा बांधे रखना…

तेरे माथे पर सदा विजय तिलक लगाती रहे बहना !

सुख समृद्धि से भरा रहे तेरा घर अंगना !! 

खुशीयों से खिलखिलाती

सौभाग्यवती बन के आती रहे तेरी प्यारी बहना !!

दोनों कुल की लाज बचाए तुम्हारी प्यारी बहना !!

 श्यामा प्रभाकर दास

    मुम्बई

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!