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जीवन की दिशा

जीवन की दिशा

 

जीवन-यात्रा में पहुँच गई, अब चौथे पड़ाव पर,

जीवन की दिशा दिखाई, अनुभव लाया मोक्ष द्वार पर।

 

पर्वत-सी कठिन राह थी, कितने आए घुमाव,

हौसले ने राह दिखाई, बढ़ते गए कदमों के भाव।

 

शिखर पर जब पहुँची मैं, समझा जीवन का सार,

त्याग-तपस्या ने सिखलाया, कैसे हो उद्धार।

 

जीवन की दिशा सदैव, हौसले ने मुझे दिखाई,

कठिन समय में धैर्य रखकर, हर बाधा मैंने पाई।

 

अब शरीर ढल गया है, फिर भी मन में ज्योति जगी,

गुरु के पावन चरणों में, जीवन की राह मिली।

 

प्रभु-भक्ति का दीप जला है, अंतर में उजियारा,

नाम-स्मरण से लगने लगा, जीवन कितना प्यारा।

 

कलम बनी है लाठी मेरी, शब्द बने हैं शक्ति,

लेकर प्रभु का नाम सदा, करती रहूँगी भक्ति।

 

अब क्या करना है जीवन में, प्रभु से यही पुकार,

सेवा, भक्ति, प्रेम बाँटकर, कर दूँ जीवन साकार।

 

शेष रही जो साँसें मेरी, उनको प्रभु को अर्पण,

जीवन की दिशा प्रभु-भक्ति से, मोक्ष द्वार समर्पण। 

 

हर साँस बने प्रभु-स्मरण, हर कर्म बने उपकार,

कलम चले जब तक मेरी, बाँटूँ प्रेम अपार।

 

स्वरचित 

डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’

मुजफ्फरपुर, बिहार

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