15 अगस्त स्वतन्त्रता दिवसE-Paperसाहित्य रचना

 शीर्षक लहू से लिखी आज़ादी

अंतरराष्ट्रीय मित्र मण्डल जबलपुर

तिथि 14/8/26

फेसबुक प्रतियोगिता हेतु प्रस्तुत

 

शीर्षक लहू से लिखी आज़ादी

 

लहू से लिखी आज़ादी की कहानी थी,

हर बूँद में भारत की रवानी थी।

 

यह लहू था वीर भगत सिंह का,

राजगुरु और सुखदेव का—

जिन्होंने हँसते-हँसते

फाँसी को गले लगाया था,

और भारत की धरती पर

स्वतंत्रता का परचम लहराया था।

 

बच्चों! याद रखना उनकी कुर्बानी,

कभी व्यर्थ न जाने देना

उनके बलिदान की निशानी।

 

आज हम स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं,

तिरंगे को गर्व से लहरा रहे हैं।

गूँज रहे हैं चारों ओर

“जय हिंद!” और “वंदे मातरम्!” के नारे,

शहीदों के बलिदान से ही

रोशन हैं ये आज़ादी के उजियारे।

 

आओ, आज संकल्प करें—

देश की आन, बान और शान बनाए रखेंगे,

शहीदों के सपनों का भारत

मिल-जुलकर सजाएँगे।

 

उनकी कुर्बानी को

कभी व्यर्थ नहीं जाने देंगे—

भारत माँ का तिरंगा

सदा ऊँचा लहराएँगे।

 

जय हिंद! 🇮🇳

वंदे मातरम्!

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