आँखों में समंदर

आँखों में समंदर
अपने आँखों के समंदर में डूब जाने दे मुझे,
जो प्यार और दर्द की गहराई को व्यक्त करते हैं।
आँखों में समंदर भरा है, जो तेरी आँखों में दिखता है,
मैं भी तेरी आँखों के समंदर में डूब जाने का इरादा रखती हूँ।
क्या-क्या छिपा है इस समंदर की गहराई में,
तेरे ख़यालों का, तेरी ख़्वाहिशों का क्या-क्या छिपा है।
तेरी आँखों में किसका ख़्वाब झिलमिलाते रहते हैं,
तेरी आँखों में देखकर मैं भी पहचानूँ कौन है वो प्यारे।
जिसकी याद में तड़प-तड़प कर आँसू बहते ही जाते हैं,
मैं जान गई, वो प्यारी-सी राधा की मूरत ही है प्यारे,
वो ही प्यारी-प्यारी मूरत नज़रों में बसी है मेरे।
मेरी आँखों में वो प्यारे-प्यारे श्याम सलोने छिपे हैं।
घुँघराले बाल वाले, मधुर-मधुर मुस्कान लिए,
प्यारी-प्यारी वंशी मधुर सुनाते, मेरे कानों में रस घोलते,
उसी के प्रेम में मगन रहता हर क्षण यह मेरा मन,
उसके लिए छोड़ दिया यह संसार प्यारा।
अब कैसे चलेगी यह जीवन धारा,
दूर हो गया हूँ मैं, जो था सबसे प्यारा।
मैं सब छोड़ के आई हूँ पास तेरे,
तेरी आँखों के समंदर में डूबकर ही है अब जीवन मेरा।
तेरे लिए छोड़ दिया यह जग सारा,
प्रारब्ध का लेखा जो है, वो तो होगा ही सब प्यारे,
लेकिन मेरे मन की जो इच्छाएँ हैं, सदा से प्यारे,
दिल में प्यार है सदा से तेरे लिए।
मैं भी चाहूँ गोपी बनकर तेरे नैनों में समाए रहूँ,
लोग कहते बंसी मधुर सुनकर मेरे मन को भाते,
उसी के प्रेम में मगन हरदम दिल ये मिलते,
जिसके दिल में भाव जैसा, वैसा ही प्रेम पाते कृष्ण का।
आँखों में समंदर हो तो कृष्ण के प्रेम अंदर समाए रहते,
मैं भी गोपी बनकर इंतज़ार करती हूँ तेरी,
डूबी हूँ तेरी आँखों के समंदर में,
उनकी आँखें ही प्यार की निशानी हैं मेरे लिए।
जिसमे अनंत ब्रह्मांड बसे हैं नयनों में,
उन नयनों में बसकर ही पाया मैंने सारा जहाँ,
तेरी आँखों के समंदर में ही मेरा जीवन ठहरा,
अब वही मेरी दुनिया, वही मेरा आसमाँ।
— नीलम प्रभा सिन्हा




