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कुछ दर्द ( अनकहे दर्द )

कुछ दर्द ( अनकहे दर्द )

 

बाद मे खुल कर जी लेगे 

यह खुद को समझाते रहे ।

जिम्मेवारिया आती रही

और शौक जाते रहे ।

बहुत फर्क होता है

जरूरत और जरूरी मे ।

सब कुछ हासिल नही होता

एक ही जिन्दगी मे ।

ऐसी दिलाशाऐ 

मन मे आती रही की

कही किसी का काश

कही किसी अगर 

रह ही जाती है ।

वक्त वक्त की बात है

कल जो रंग हुआ करते थे ।

वो आज दाग हो गए 

न कर नसीब से इतनी शिकायते ।

जब वो राजी होता है तो

हर चीज कदमो मे डाल देता है

न करना नसीब से शिकायते कभी ।

जो है जहा है जैसा है सही है 

 

ये बिश्वास मन मे सजाए रखना ।

 

नीलम प्रभा सिन्हा

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