जाति वर्ण लोकतंत्र पर भारी है।

जाति वर्ण लोकतंत्र पर भारी है।
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जाति वर्ण लोकतंत्र पर भारी है।
लोकतंत्र में भी देखो जाति पाति से पहचान हमारी है।
कम होने की जगह दिन प्रतिदिन बढ़ रही यह बीमारी है।
उच्च जाति निम्न जाति विभिन्न जाति तेरी जाति मेरी जाति, उलझे इनमें जाते हैं,
लोकतंत्र में योग्यता ना देखकर वोट अपनी जाति के प्रतिनिधि को दे जाते हैं।
समझ क्यों नहीं आता यह मन: स्थिति देश को नुक्सान पहुंचाती है।
जब जब भी लोकतंत्र पर जाति व्यवस्था भारी हो जाती है।
देश को आगे बढ़ाना चाहो तो जाति वर्ण से ऊपर उठना होगा।
देशवासी देश प्रेमी बनकर ही देश को आगे बढ़ाना होगा।
देश का एकमात्र धर्म मानव धर्म बनाना होगा।
अपनाकर मानवता को निज और स्व को भुलाना होगा।
देश के उत्थान का ही प्रत्येक देशवासी को लक्ष्य बनाना होगा।
जाति वर्ण को लोकतंत्र पर भारी ना बनाना होगा।
मधु वशिष्ठ, फरीदाबाद, हरियाणा।




