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मुंशी प्रेमचंद्र शत् शत् नमन

मुंशी प्रेमचंद्र शत् शत् नमन

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जहाँ हर ओर असमाजिक तत्व फैला हुआ था

निर्बल , निसहाय समाज में लड़ रहा था

इस परिस्थिति को देखकर ही बालक प्रेमचंद्र के मन पर पड़ा गंभीर प्रभाव

बहुमुखी , प्रतिभा के धनी शब्दों की सुन्दर भाव को अंकित करके राह दिखाया था।

अपने हर कविता में कलम का सार दिखाया था।

कलम न उनकी रुकी,

कलम न उनकी बिकी,

कलम की शक्ति से हिन्दी साहित्य प्रबल प्रवाह में बह गया।

शब्दों के जादूगर बन कर हर परिस्थितीयों से लड़ना सिखाया था ।

अपनी लेख, कवित, उपन्यास को ही अपना शस्त्र बनाया था।

जीवंत उनकी लेखनी थी, हर समाज ने अपनाया था।

उनकी कथा से लगता था हर घर की कहानी है।

कहीं कफ़न, गोदान, कहीं निर्मला भी दुखती कहानी है।

ईदगाह के छोटे बच्चे की मानसिकता को दोहराया था।

बड़े घर की बेटी से घर की लाज बचाया था।

नई पीढ़ियों को साहित्य से मार्गदर्शन कराया था।

प्रेम दया त्याग को लेखनी से सुन्दर साहित्य बनाया था ।

अपनी लेखनी से सभी के हृदय में पीड़ा, प्रेम , त्याग भेदभाव का उपजाया था।

टूटे हुए मनोबल को शक्ति प्रदान कराया था।

उनकी अमर कलम सदा सत्य ही दर्शाया था।

धरा से गरीब, शब्दों से अमीर मुंशी प्रेमचंद्र कहलाया था।

हिन्दी का परिचय नया आयाम से कराया था।

    शत् शत् कोटि नमन

हे शब्दों के जादूगर !

श्यामा प्रभाकर दास

     मुम्बई

३१/०७/२६, शुक्रवार

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