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मित्रता

मित्रता 

 

मित्र वही, जो अंतरमन की व्यथा जान ले

आँखों की भाषा बिना कहे पहचान ले।

मन की हलचल उसका हृदय शीशे सा पढ़ ले,

मुस्कान में छुपा हर दर्द झटसे वो पकड़ ले।

 

बिना बोले समझे जो हर भाव हमारे,

मीठी बातों में घोले अपनापन सारे।

मित्रता का रंग बस निर्मल विश्वास हो,

दिल में बसा प्यार, न कोई स्वार्थपास हो।

 

मित्रता तो झरना है, बहता रहे सदा,

सच्चे दिल का बंधन, बरसों तक निभता।

मित्र वही, जो दूर रहकर भी पास लगे,

हर पल, हर सांस में अपनी यादें छोड़ जाए।

 

सच्चा मित्र वही, जहाँ दिल का निश्छल जुड़ाव हो,

मूक दुआओं में शामिल हो, हर मुस्कान में भाव हो।

समय बदल जाए, पर वो साथ न छूटे कभी,

मित्रता बसे आत्मा में, वही बंधन छूटे नहीं कभी।

 

नीलम प्रभा सिन्हा

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