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गुरु- पूर्णिमा

गुरु- पूर्णिमा

 

गुरु बिन जीवन शून्य है, गुरु जीवन की आस।

ज्ञान-ज्योति से जगमगें, मिटे हृदय की प्यास॥

 

वेद-व्यास की पुण्य स्मृति, पावन यह उत्सव खास।

ज्ञान-सुधा बरसा रहे, गुरु पूर्णिमा खास॥

 

शिव शंकर जग के गुरु, करुणा के भंडार।

अज्ञान तम हरते सदा, देते ज्ञान अपार॥

 

मात-पिता प्रथम गुरु, फिर आचार्य महान।

जीवन पथ आलोकित करें, देकर शुभ पहचान॥

 

गुरु चरणों की धूल से, पावन हो संसार।

भवसागर से पार हों, मिटे सकल अंधकार॥

 

सद्गुरु वाणी अमृतमय, जीवन का विश्वास।

सत्य, धर्म, सद्बुद्धि मिले, बढ़े सदा उल्लास॥

 

गुरु कृपा जिस पर हुई, सफल हुए सब काम।

ज्ञान, विनय, सेवा मिले, ऊँचा होता नाम॥

 

गुरु पूर्णिमा पर्व यह, श्रद्धा का उपहार।

शत-शत वंदन गुरुदेव को, बारम्बार नमस्कार॥

 

स्वरचित 

डाॅ सुमन मेहरोत्रा’ सुरभि’

मुजफ्फरपुर, बिहार

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