गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर सर्वप्रथम मेरे जीवन के प्रथम गुरु

गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर सर्वप्रथम मेरे जीवन के प्रथम गुरु, मेरे जीवनदाता, मेरे पूज्य पिताश्री के श्रीचरणों में मेरा सादर प्रणाम एवं कोटि-कोटि वंदन। आपके स्नेह, संस्कार, अनुशासन और आशीर्वाद ने ही मेरे जीवन को दिशा, उद्देश्य और आत्मविश्वास प्रदान किया।
गुरु वह दीप हैं, जो स्वयं जलकर अनगिनत जीवनों को आलोकित करते हैं। वे वह वटवृक्ष हैं, जिनकी छाया में ज्ञान, संस्कार और जीवन का सत्य फलता-फूलता है। शिष्य की प्रत्येक उपलब्धि में कहीं न कहीं गुरु के त्याग, तप और आशीर्वाद की अमिट छाप होती है।
आज गुरु पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर उन समस्त गुरुजनों के श्रीचरणों में सादर प्रणाम, जिन्होंने हमें केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि जीवन को सार्थक बनाने की दृष्टि भी प्रदान की।
गुरु की वाणी से जागे मन,
गुरु की कृपा से मिले सम्मान।
जिनके चरणों में बसता ज्ञान,
उनको मेरा शत-शत प्रणाम।
समस्त गुरुजनों को सादर नमन एवं गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ।
— श्री ठाकुर, देवघर (झारखंड)




