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अभिमन्यु की प्रासंगिकता

अभिमन्यु की प्रासंगिकता

 

कलियुग की विभीषिका में

दिखाओ अदम्य साहस को।

समय की जटिल चुनौतियों में

तैयार रहो मर-मिटने को।

 

जीवन की इस रणभूमि में

अनेक विचित्र विघ्न मिलेंगे।

निर्भयता का परिचय देकर

अभिमन्यु बन अडिग खड़े रहेंगे।

 

युद्ध की मर्मभेदी ध्वनि में

सहायता की पुकार न करना।

विपरीत समय के तूफ़ानों में

शांत रह धैर्य कभी न खोना।

 

छिपा हुआ अभिमन्यु तुममें है,

स्वयं को कभी असमर्थ न समझना।

चलते कदम रुकने न पाएँ,

हर चक्रव्यूह को भेदते चलना।

 

बल, बुद्धि और पराक्रम से

अभिमन्यु-सी चतुराई दिखाना।

हार-जीत की चिंता छोड़,

अविस्मरणीय कर्म कर जाना।

अमिता मराठे 

इंदौर मध्य-प्रदेश

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