
दिनांक 16.7.26
दैनिक सृजन
शीर्षक
जगन्नाथ रथयात्रा
आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की
द्वितीया तिथि के शुभ अवसर पर,
ओडिशा के पावन धाम पुरी से
आरंभ होती है जगन्नाथ रथयात्रा।
पुण्यदायिनी यह दिव्य यात्रा
उमंग, उत्साह और अपार श्रद्धा का।
अनुपम दृश्य
प्रतिवर्ष भक्तिभाव से
संपन्न होता।
भगवान श्री जगन्नाथ जी,
अग्रज श्री बलभद्र जी
और भगिनी माता सुभद्रा जी के संग
भव्य रथ पर विराजमान होते ।
जब वे मौसी के घर,
गुंडिचा मंदिर की ओर प्रस्थान करते,
तब यह अलौकिक यात्रा
आस्था और भक्ति का अनुपम उत्सव बन जाता।
लाखों श्रद्धालुओं की मनोकामनाएँ
रथ के स्पर्श मात्र से
सफल सम्पूर्ण होगी।
यही सौभाग्य मानते।
प्रभु की विशाल, करुणामयी आँखें
मानो हर भक्त के अंतर्मन को निहारती
दर्शन पाकर श्रद्धालु
होते परम भाग्यशाली ।
हृदय में संजोईआशाएं
पूरी हो हे भगवन ऐसी
विनम्र प्रार्थना करते ।
जय श्री जगन्नाथ!
यह मंगलमय उद्घोष
भक्तों को भक्ति-रस में सराबोर कर देता है।
जय जगन्नाथ!
जय हरि बोल! जय हरि बोल!
अमिता मराठे
इंदौर (मध्य प्रदेश



