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नारी

नारी

 

ईश्वर ने एक सुन्दर रचना बनाई 

सभी को एक बेस कीमती उपहार दिया ।

नाम रखा उसका नारी ।

जो हर घर को स्वर्ग बनाती ।

अपने भूखे रह कर भी,

अपने बच्चो को भूखा कभी नही रखती ।

अपना दर्द छिपा कर भी दिल मे ,

अपनो के चेहरे पर मुस्कान ही मुस्कान लाती ।

कभी बहन बन कर, कभी मां बन कर । 

कभी पत्नी रूप मे सपनो को साकार करती हर क्षण मुस्कान लिए ।

बेटी बन कर घर की रोनक बढाती ,

हर हाल मे हंसती रहती ।

कभी गम आता उनके निकट ,हंस कर टाल जाती ।

ममता और त्याग के लिए, 

जगत विख्यात है नारी ।

वो शान्त रहती चुप रहती लेकिन, 

कभी न घबराती कभी न हारती ।

हर पल जुझती समस्याओ से अपनी ।

कहती न किसी से कभी अपने आप ।

जब नारी उठ खड़ी होती तो,

किसी की भी नही सुनती ।

अपनी ताकत पर अटूट बिश्वास 

लिए रहती ।

नारी दर्द सह कर भी मुस्काती रहती ।

दुनिया को प्यार और इन्सानियत 

सिखाती। 

अपने टूट कर भी सब को संभालती ।

यह नारी है नारी जिसे ईश्वर ने बनाया ।

 

नीलम प्रभा सिन्हा 

धनबाद झारखंड

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