
शुभ दिन
रक्षाबंधन
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“येन बद्धो बली राजा
दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामभिबध्नामि
रक्षे मा चल मा चल II”
रक्षासूत्र बांधते समय हर बहन यह मंत्र बोलती है। हे रक्षासूत्र ! तुम हर संकट से मेरे भाई की रक्षा करना ।
जिस रक्षासूत्र से माता लक्ष्मी असुर राज राजा बलि को बांधी थी और असुरराज बलि माता लक्ष्मी को अपनी धर्म बहन मानने लगे ।
इतनी पवित्रता इस कच्चे सूत में है।
यह सूत भेदभाव नहीं जानती ।
रानी कर्णावती ने भी जब यह सूत हुमायूं को भेजी थी तो वह भी इसका मान रखा।
श्रीकृष्ण की अंगूली में अपनी साड़ी की टुकड़े से द्रौपदी रक्त बहने से बचाती है तो वही श्रीकृष्ण चीर हरण के समय उन्हें बचाते हैं।
रक्षाबंधन यही पावन पर्व है। हर बहन – भाई इस में बंधकर एक दूसरे का मान सम्मान और विश्वास स्नेह बनाएं रखते हैं। कहीं भाई विदेश में है तो कहीं दूर देश की सीमा का रक्षा कर रहा होता । पर यह रक्षासूत्र की डोर से उसके मन में विश्वास रहता है कि बहन मेरे लिए मंगल कामना कर रही है ॥
✍🏻 श्यामा प्रभाकर दास
मुम्बई




