
राधे राधे जी
कविता
गवाह
कण कण गवाह मथुरा के
मेरे कृष्ण जन्म लिए है वहां
अंगूठे पर खडे हो कर
भीड से भरी आवादी मे
जो देखा मैने
कृष्ण की अनोखी छवि मथुरा मे
काले काले घूघर बालोवाले श्याम
हँसता हँसता चेहरा
भूल न पाऊ एक पल भी
तेरी वो प्यारी प्यारी
काली काली वो छवि
सिर्फ एक पल ही
मेरी आखो मे बस पायी
आखो के अन्दर ही रहना
मेरा दिल तुझको पूकारे
ओ कृष्णा ओ कृष्णा
तुम रहना मेरे दिल के अन्दर
मेरा रोम रोम तुझको समर्पित
ओ कृष्णा ओ कृष्णा
देखते देखते मैने देखा
मंदिर मे
तेरी काली काली आखे
थोडी सी हिल गई
लगा जैसे तुमने
अपनी पलक झपकाई
पलक झपका कर
तुने जो मुझे देखा
मैतो सकते मे आ गई
अपनी अखियाफिर फिर
मिच मिच कर देखी
इस अनहोनी घटना को
दिखा दे दिखा दे
तू एक बार फिर दिखा दे
दरश अपनीदिखा दे
तुझ पर मेरा भी हक है बनता
मन ही मन मै
तुझको ही भजता
बोल न पाऊ मै
जग से अपनी बतिया
समझ मेरे भोले कृष्ण कन्हैया
दिल पर तेरा नाम खुदा है
पल पल निहारू
मै तुझको ओ कृष्णा ओ कृष्णा
नीलम प्रभा सिन्हा




