इंकलाब जिंदाबाद

इंकलाब जिंदाबाद
डॉ. अंजली सामंत
भारत की मिट्टी में धँसी हैं इंकलाब की जड़ें गहरी,
यह देश क्रांतिकारियों का है, नौजवानों का है॥1॥
इतिहास गवाह है, राष्ट्रहित में निकले हैं छात्र जंतर-मंतर तक।
मारो, पीटो, कुचलो, खून बहाओ।
पर हमारे भविष्य का सौदा नहीं होने देंगे॥2॥
विश्व को ज्ञान देने वालों, अपने ही बच्चों से कुछ सीखो।
क्या अपने ही बच्चों को निगल जाओगे?
कानून के रखवाले ही भक्षक क्यों बन गए हैं?
जिस कोख ने जन्म दिया, क्या उसी को मिटा दोगे?॥3॥
सड़कों पर आंदोलन करती बेटियाँ कोई खिलौना नहीं हैं।
अगर कानून ने खून बहाया, तो इंकलाब ज़रूर होगा॥4॥
सारे धंधे छोड़कर पेपर लीक का कारोबार सबसे तेज़ है।
ये जानवरों के बच्चे नहीं, ये देश के भविष्य हैं।
क्रांति करेंगे हम – यही नया भारत है।
संविधान हाथ में है, पीछे नहीं हटेंगे॥5॥
इंकलाब जिंदाबाद! जिंदाबाद!! जिंदाबाद!!!॥6॥




