
शीर्षक : जीवन सरिता
- मुखड़ा :
जीवन इक बहती सरिता है, रुकना इसका काम नहीं।
चलते-चलते मंजिल मिलती, हार हमारा नाम नहीं।।
धूप मिली तो छाँव भी आई, दोनों का सम्मान करें।
काँटों वाली कठिन डगर पर, हँसते-हँसते पाँव धरें।
संकट चाहे लाख खड़े हों, मन में हो अविराम यकीन,
साहस जिसकी ढाल बनी हो, उसका होती शाम नहीं।
जीवन इक बहती सरिता है, रुकना इसका काम नहीं।
चलते-चलते मंजिल मिलती, हार हमारा नाम नहीं।।
श्रम की बूँदें मोती बनकर, जीवन का श्रृंगार करें।
सच्चे कर्मों की सुगंध से, अपना हर व्यवहार भरें।
झुककर जो फल देना जाने, वही वृक्ष महान बने,
सेवा से बढ़कर जग में तो, कोई पावन धाम नहीं।
जीवन इक बहती सरिता है, रुकना इसका काम नहीं।
चलते-चलते मंजिल मिलती, हार हमारा नाम नहीं।।
आँधी आए या तूफाँ हो, दीपक फिर भी जलता है।
संकल्पों के दृढ़ पंखों से, मानव नभ में उड़ता है।
आशा का विश्वास लिए हम, आगे ही बढ़ते जाएँ,
कर्मपथी के चरणों को तो, रोक सके अंजाम नहीं।
जीवन इक बहती सरिता है, रुकना इसका काम नहीं।
चलते-चलते मंजिल मिलती, हार हमारा नाम नहीं।।
स्वरचित
डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर ,बिहार




