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तेरी चुनरिया की छांव

तेरी चुनरिया की छांव

तेरी चुनरिया की छांव में,
मुझे दुनिया की खुशियां मिली,
जीवन में धूप चाहे तेज रहे,पर
तेरी मुझे शीतलता मिली।

मैया तेरी चुनरी जब लहराए,
मन के बादल बरसता है,
भूख,प्यास, दुख,दर्द बाधाएं,
तेरे आंचल में ये कटता है।

अपने पराए लगने लगे,
जब रिश्तों ने मुंह मोड़ लिये ,
मां चुनरी की छांव में मुझको,
सुख,शांति, भरपूर दिये ।

मां तेरी चुनरियां नवरात्रि में,
भक्तों के मन लुभाने लगी।
एक छोर में बंधी प्रार्थना,दूजे
में कृपा बरसाने लगी।

मां तेरी चुनरिया की छांव तले,
काँटों पर फूल खिल जाते हैं।
जिसके सिर पर तेरा हाथ रहे,
उसको तो स्वर्ग मिल जाते हैं।

मां तेरी चुनरिया की छइया,
सबसे न्यारी सबसे प्यारी,
तेरी कृपा के बिना जीवन,
सब लगने लगती अंधियारी।

मां तेरी चुनरिया के छांव तले,
दुःख भी सुख बन जाते हैं,
जैसे पहली किरण की उजले,
में अंधियारे कट जाते हैं।

जब तेरी चुनरिया लहराए,
तब आसमान से फूल गिरे,
जब हवा चले खुश्बू बिखरे,
मां चन्द्र के सिर आशीष फिरे।

चन्द्रकला शर्मा
प्रधान पाठक
बेमेतरा छत्तीसगढ़

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