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पुत्र का कर्तव्य

पुत्र का कर्तव्य
पुत्र कर्तव्य है माता-पिता के,
हर सपनों को उड़ान देना ।
जिस गोदी में बचपन खेला,
उसको मान, सम्मान देना।
सुबह उठकर सबसे पहले,
माता-पिता के हाल पूछना।
रोटी को पहले उन्हें खिलाना,
दवा का समय नहीं भूलना।
आंखों में आंसू नहीं आने देना,
गलती में डांट भी सहना है ।
जिन हाथों ने चलना सिखाया,
उन हाथों की लाठी बनना है।
पैसा कमाना आवश्यक है पर,
साथ ही माता-पिता का मान।
अपना भी ख्याल रखना है,
माता-पिता का रखना ध्यान।
पुत्र वही जो सहारा बने,
सुख में साथी, दुःख में ढाल।
माता पिता जिनको पाले हैं,
वो पुत्र भी करे सदा देखभाल।
जिसने बचपन में हाथ पकड़,
चलना, संभलना सिखलाया।
सुपुत्र सदा सहारा दे उनको,
वेद पुराण में है बतलाया।
चन्द्रकला शर्मा
प्रधान पाठक
बेमेतरा छत्तीसगढ़



