E-Paperसाहित्य रचना
शिवत्व

दिनांक 04/08/26
दिन_मंगलवार
शिवत्व
शिवत्व जो सबका है हितकारी शिवशंकर सुनते सदा त्रिपुरारी ।
शिवत्व सबको करते प्यार प्रभु असूरों वर दे पड़ते अब भी भारी।
शिवत्व में गुण देखो नाम जपे सो तारे ना जीते तो मैं बलिहारी।
शिवत्व कि लीला देखो मंथन से सब के आया हलाहल कंठ से उतारी
शिवत्व ले सावन में आए कांवड़िया हर-हर
शिवशंकर हरे भंडारी।
शिवत्व जब सुनते हैं देखो शिव करुणाकर
भालचंद्र जटा गंग धारी।।
स्वरचित मौलिक है
पुष्पा निर्मल
बेतिया बिहार





