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अमर प्रेम

अमर प्रेम
अमर प्रेम है मेरे तुम्हारे श्याम
जब तक जीए
साथ तुम्हारे
फूलों की खुशबू जैसे
महके गम गम रूप तुम्हारे
तेरी यही पहचान बनी
साथ जीव साथ मेरे
कोई कुछ भी कर दे
जीना दूभर कर दे
हर क्षण जिसकी याद सताए
सोते जगते उठते बैठते
पल भर भी जिसको भूल ना पाए
दिल पर रहते ऐसे छाप
जैसे सूरज धूप संग छाया
हर पल मेरे काम आए
सब दुख में हर पल आए
कैसे रहूं श्याम बिन तुम्हारे
चाहे कोई उलझन आए
पल भर में दूर भगाए
कैसे करूं मैं तुम्हारी विनती तेरी
कुछ भी ना मैं कर सकूं
सब कुछ है महिमा तेरी
तुझसे है अस्तित्व हमारे
तू चाहे स्वर्ग बना दे
तू चाहे नरक पहुंचा दे
तेरी महिमा अपरम्पार
मैं भी हूं तेरे लिए बेकरार मेरे मीत रे
नीलम प्रभा सिन्हा




